जयपुर: त्रिपोलिया बाजार आतिश मार्केट पार्किंग में भ्रष्टाचार का खुलासा, नगर निगम कर्मचारी सरकारी पैसे की बंदरबांट में लिप्त
जयपुर: त्रिपोलिया बाजार आतिश मार्केट पार्किंग में भ्रष्टाचार का खुलासा, नगर निगम कर्मचारी सरकारी पैसे की बंदरबांट में लिप्त
**देश का दर्पण ब्यूरो, जयपुर**
*फरवरी 09, 2026*
जयपुर के न्यू गेट के पास स्थित त्रिपोलिया बाजार आतिश मार्केट में चल रही पार्किंग व्यवस्था में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों की लगातार शिकायतों के आधार पर 'देश का दर्पण' न्यूज टीम ने मौके पर जांच की, जहां नगर निगम के कर्मचारी सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पकड़े गए। यह पार्किंग नगर निगम द्वारा अपने कर्मचारियों के माध्यम से संचालित की जा रही है, लेकिन यहां के अधिकारी और कर्मचारी सरकारी धन का दुरुपयोग कर खुद की जेबें भर रहे हैं।
टीम ने दो-तीन घंटे तक पार्किंग स्थल पर रहकर स्थानीय लोगों और वाहन मालिकों से बातचीत की। जांच में पता चला कि कई वाहन मालिक महीने में 2,500 रुपये देकर स्थायी पार्किंग का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नगर निगम के रिकॉर्ड में नहीं है। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने दावा किया कि उन्हें ऐसी व्यवस्था की जानकारी नहीं है, लेकिन वाहन मालिकों ने स्पष्ट कहा कि वे नियमित रूप से यह राशि जमा करते हैं।
इसके अलावा, एक दिन के लिए चार-पांच घंटे की पार्किंग के लिए 70 रुपये लिए जाते हैं, लेकिन पुराने और परिचित वाहन मालिकों को कोई रसीद नहीं दी जाती। यह पैसा कर्मचारियों के बीच आपस में बांटा जाता है। कुछ हिस्सा बड़े अधिकारियों तक पहुंचता है, जबकि बाकी राशि पार्किंग में तैनात कर्मचारी अपने व्यक्तिगत खर्चों के लिए रख लेते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि तीन-चार कर्मचारी मिलीभगत से यह खेल खेल रहे हैं, जिससे सरकार को लाखों रुपये का चूना लग रहा है।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "ये कर्मचारी सालों से यही कर रहे हैं। हम शिकायत करते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। पार्किंग का पैसा सरकार की बजाय इनकी जेब में जा रहा है।" एक अन्य वाहन मालिक ने कहा, "हम तो नियमित भुगतान करते हैं, लेकिन रसीद न मिलने से हमें भी संदेह होता है कि पैसा कहां जा रहा है।"
'देश का दर्पण' की जांच से स्पष्ट है कि यह भ्रष्टाचार संगठित रूप से चल रहा है। नगर निगम के उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की कमी से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
इस मामले में तत्काल जांच की मांग उठ रही है। स्थानीय लोग और व्यापारी संघ चाहते हैं कि भ्रष्टाचार में लिप्त सभी व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। नगर निगम के प्रवक्ता से संपर्क करने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। 'देश का दर्पण' इस मुद्दे पर आगे भी नजर रखेगा और जनता की आवाज को बुलंद करेगा।
(सभी आरोपों की पुष्टि के लिए 'देश का दर्पण' टीम द्वारा मौके पर जांच की गई है।)




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