एसएमएस अस्पताल में डॉक्टरों पर पार्किंग-कैंटीन का बोझ: 30+ स्पेशलिस्ट नॉन-मेडिकल कामों में व्यस्त, प्रदेश में 4,500 डॉक्टरों की कमी

एसएमएस अस्पताल में डॉक्टरों पर पार्किंग-कैंटीन का बोझ: 30+ स्पेशलिस्ट नॉन-मेडिकल कामों में व्यस्त, प्रदेश में 4,500 डॉक्टरों की कमी



       

एसएमएस अस्पताल में डॉक्टरों पर पार्किंग-कैंटीन का बोझ: 30+ स्पेशलिस्ट नॉन-मेडिकल कामों में व्यस्त, प्रदेश में 4,500 डॉक्टरों की कमी
जयपुर: राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सवाई मान सिंह (एसएमएस) अस्पताल में चिकित्सा सेवाओं के बजाय डॉक्टरों को प्रशासनिक और नॉन-मेडिकल जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं, जिससे मरीजों की देखभाल प्रभावित हो रही है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में 30 से अधिक डॉक्टर पार्किंग, कैंटीन, लॉन्ड्री, किचन, स्टेशनरी, सिक्योरिटी, हाउसकीपिंग, सीवरेज मैनेजमेंट और ट्रॉली सिस्टम जैसी जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। इनमें न्यूरो सर्जन, ईएनटी स्पेशलिस्ट, हार्ट और किडनी के सुपर स्पेशलिस्ट भी शामिल हैं, जो सालों से मरीजों की जांच करने से वंचित हैं।
प्रदेश भर में लगभग 4,500 डॉक्टरों के पद खाली चल रहे हैं, जबकि एसएमएस जैसे प्रमुख अस्पतालों में भी स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। कई डॉक्टर इतने व्यस्त हैं कि वे चिकित्सा कार्य से दूर हो गए हैं। राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों, सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पतालों में भी स्टाफ की कमी से मरीजों को परेशानी हो रही है।
डॉक्टरों की स्थिति पर चिंता:
उच्च योग्यता वाले स्पेशलिस्ट डॉक्टरों को क्लर्क जैसा काम सौंपा जाना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है।
प्रदेश में डॉक्टर-पेशेंट रेशियो WHO मानकों से काफी नीचे है, और सरकारी अस्पतालों में स्टाफिंग केवल 65% स्तर पर है (पुरानी CAG रिपोर्ट के अनुसार)।
एसएमएस अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ के बावजूद स्पेशलिस्ट उपलब्ध नहीं होने से इलाज प्रभावित हो रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों को उनकी मुख्य जिम्मेदारी—मरीजों का इलाज—पर फोकस करने की जरूरत है। प्रशासनिक कामों के लिए अलग से स्टाफ या आउटसोर्सिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। राज्य सरकार से मांग की जा रही है कि खाली पदों पर तुरंत भर्ती की जाए और डॉक्टरों को नॉन-मेडिकल ड्यूटी से मुक्त किया जाए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो सके।
यह मामला राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था में गहरी कमी को उजागर कर रहा है, जहां पहले से ही स्पेशलिस्ट और सामान्य डॉक्टरों की कमी है।

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