प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राजस्थान में बड़ा घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने सभी जिलों में जांच तेज कर दी है।







प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राजस्थान में बड़ा घोटाला सामने आने के बाद सरकार ने सभी जिलों में जांच तेज कर दी है।
जयपुर: राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों के साथ बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और अनियमितताओं का मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में इस घोटाले का खुलासा करते हुए बताया कि बीमा कंपनियों, बैंकों और सर्वेयरों की मिलीभगत से किसानों के करोड़ों रुपये के क्लेम प्रभावित हुए हैं। अब विशेष अभियान समूह (SOG) को जांच सौंपी गई है, और सभी जिलों में रिकॉर्ड्स की गहन जांच का अभियान चलाया जा रहा है।
मंत्री ने विधानसभा में बताया कि श्रीगंगानगर जिले के करणपुर क्षेत्र में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ। यहां सर्वेयर ने किसानों, कृषि पर्यवेक्षकों और राजस्व अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए। कुल 1.70 लाख इंटीमेशन फॉर्म्स की जांच में करीब 32,000 फॉर्म्स ऐसे मिले जहां वास्तविक फसल क्षति 50-70% होने के बावजूद शून्य प्रतिशत नुकसान दिखाया गया। इससे किसानों को लगभग 128 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रावला थाने में इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू हो चुकी है।
प्रमुख घोटाले के मामले:
क्षेमा इंश्योरेंस कंपनी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। राज्य सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाए और भविष्य में कोई टेंडर न दिया जाए।
सालासर (चूरू) स्थित एसबीआई शाखा में 71 फर्जी किसानों के नाम पर जाली दस्तावेजों से बीमा पॉलिसी जारी की गईं। इनके नाम पर 9 करोड़ रुपये का फर्जी क्लेम तैयार किया गया था। शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत और कर्मचारी भागीरथ नायक सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज है।
राज्य स्तर पर 15,000 फर्जी किसानों (जिनके पास कोई जमीन नहीं थी) के नाम पर बीमा किया गया, जिससे 1,150 करोड़ रुपये तक के क्लेम पास होने का आरोप है।
अन्य प्रभावित जिले: नागौर, बीकानेर, चूरू, जालौर, संचौर आदि में भी समान अनियमितताएं सामने आई हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि यह "बीमा माफिया" द्वारा संगठित अपराध है, जिसमें बैंकों, बीमा कंपनियों और मध्यस्थों की सांठगांठ शामिल है। सरकार ने किसानों के लंबित क्लेम (करीब 122 करोड़ रुपये) का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने का वादा किया है। सभी जिलों में विशेष टीमों द्वारा रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि फर्जी क्लेम और अपात्र लाभार्थियों का पता लगाया जा सके। दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया तेज है।
किसानों से अपील की गई है कि वे किसी भी अनियमितता की शिकायत तुरंत कृषि विभाग या स्थानीय पुलिस से करें।

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