राजस्थान ऊन उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य: FY 2023-24 में कुल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा**







*राजस्थान ऊन उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य: FY 2023-24 में कुल उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा**

**जयपुर, 17 फरवरी 2026** — भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) द्वारा जारी **बेसिक एनिमल हस्बैंडरी स्टैटिस्टिक्स (BAHS) 2024** के अनुसार, राजस्थान ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में ऊन उत्पादन में अपना प्रभुत्व बरकरार रखा है। राज्य ने कुल **16,013.50 हजार किलोग्राम** (लगभग 1.601 करोड़ किग्रा) ऊन का उत्पादन किया, जो देश के कुल ऊन उत्पादन का **47.53%** है। इससे राजस्थान देश का सबसे बड़ा ऊन उत्पादक राज्य बना हुआ है।

देश का कुल ऊन उत्पादन FY 2023-24 में **33.69 मिलियन किलोग्राम** (3.369 करोड़ किग्रा) रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में **0.22%** की मामूली वृद्धि दर्शाता है। राजस्थान की यह उपलब्धि मुख्य रूप से राज्य के शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु, विशाल भेड़ पालन क्षेत्र और स्थानीय भेड़ नस्लों (जैसे मारवाड़ी, जैसलमेरी आदि) के कारण संभव हुई है। यहां भेड़ पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालकों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है।

**शीर्ष ऊन उत्पादक राज्यों की सूची (FY 2023-24):**
- **राजस्थान**: 16,013.50 हजार किग्रा (47.53%)
- **जम्मू और कश्मीर**: 7,770 हजार किग्रा (23.06%) — यहां ठंडी जलवायु से बेहतर गुणवत्ता वाली फाइन ऊन मिलती है।
- **गुजरात**: 2,083.50 हजार किग्रा (6.18%)
- **महाराष्ट्र**: 1,601.28 हजार किग्रा (4.75%)
- **हिमाचल प्रदेश**: 1,422.69 हजार किग्रा (4.22%)

ये पांच राज्य मिलकर देश के कुल ऊन उत्पादन का **85.74%** से अधिक योगदान देते हैं। अन्य प्रमुख राज्य कर्नाटक, तेलंगाना आदि हैं।

**महत्वपूर्ण तथ्य:**
- भारत दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी भेड़ जनसंख्या (लगभग 77.4 मिलियन) वाला देश है, लेकिन ऊन उत्पादन में वैश्विक स्तर पर **नौवें स्थान** पर है।
- राजस्थान में ऊन मुख्य रूप से **कार्पेट-ग्रेड** (मोटी ऊन) का उत्पादन होता है, जो कालीन, हैंडलूम और टेक्सटाइल उद्योग के लिए उपयोगी है। हालांकि, फाइन ऊन की मांग पूरी करने के लिए भारत आयात पर निर्भर रहता है।
- वार्षिक वृद्धि दर में **पंजाब** (22.04%) सबसे आगे रहा, उसके बाद तमिलनाडु (17.19%) और गुजरात (3.20%)।
- राजस्थान में **जोधपुर** ऊन उत्पादन का प्रमुख केंद्र है, जहां **केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (Central Wool Development Board)** स्थित है, जो ऊन प्रसंस्करण, अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह उपलब्धि राजस्थान की पशुपालन परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर नस्ल सुधार, आधुनिक शीयरिंग तकनीक और मूल्य संवर्धन से उत्पादन और बढ़ सकता है।

**देश का दर्पण** से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऊन उद्योग ग्रामीण रोजगार और टेक्सटाइल निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है, और राजस्थान का यह नेतृत्व देश की ऊन अर्थव्यवस्था में स्थिरता प्रदान करता है।

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