डीडवाना रोडवेज डिपो में उबाल: परिचालक राजेंद्र प्रसाद शर्मा का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
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डीडवाना रोडवेज डिपो में उबाल: परिचालक राजेंद्र प्रसाद शर्मा का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
डीडवाना जिला से मोहम्मद साकिर राजस्थान*
*डीडवाना से खबर*
डीडवाना रोडवेज डिपो में उबाल: परिचालक राजेंद्र प्रसाद शर्मा का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
डीडवाना। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) के डीडवाना डिपो में उस समय हड़कंप मच गया, जब डिपो के ही एक परिचालक (कंडक्टर) राजेंद्र प्रसाद शर्मा अपनी मांगों और प्रशासन की कार्यप्रणाली के खिलाफ डिपो के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। राजेंद्र प्रसाद ने डिपो प्रबंधन पर शोषण, भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।
काम लो और नोटिस थमा दो' की नीति का विरोध
धरने पर बैठे राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि डिपो में अधिकारियों का रवैया तानाशाही पूर्ण हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों से पहले अतिरिक्त काम लिया जाता है और जब कर्मचारी पूरी ईमानदारी से काम कर देता है, तो उसे इनाम के बजाय 'नोटिस' या 'चार्जशीट' थमा दी जाती है। उन्होंने कहा, "प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य कर्मचारियों की सर्विस फाइल खराब करना है ताकि वे भविष्य में प्रगति न कर सकें।
अव्यवहारिक टाइम-टेबल और सुरक्षा से समझौता
परिचालक ने डिपो के नए शेड्यूल पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने बताया पहले सीकर मार्ग पर सवा दो से तीन घंटे का समय मिलता था, जिसे अब घटाकर मात्र 2 घंटे कर दिया गया है।समय कम होने के कारण बस को तेज चलाना पड़ता है, जिससे सवारियां बैठाना मुश्किल हो गया है। पहले जहां 10 से 12 हजार की इनकम होती थी, अब दबाव के कारण वह कम हो रही है।8 घंटे की आधिकारिक ड्यूटी के बजाय कर्मचारियों से 12 से 16 घंटे तक काम लिया जा रहा है। राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि उन्हें एक दिन में ढाई की जगह तीन चक्कर लगाने पर मजबूर किया गया, जिसके कारण उन्हें सुबह 5 बजे खाली गाड़ी लेकर निकलना पड़ा।
भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप
राजेंद्र प्रसाद ने अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ही बस के चालक (ड्राइवर) को तो तुरंत आराम (Rest) दे दिया जाता है, लेकिन परिचालक की सुध लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया, "क्या हम ड्राइवर के साथ ड्यूटी नहीं करते? हमारे साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जूनियर कर्मचारियों के ड्यूटी चार्ट में धांधली की जा रही है और नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।
अवैध वाहनों की शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं
परिचालक का कहना है कि वे लगातार सड़क पर चल रहे अवैध वाहनों और निजी बसों की फोटो व सबूत अधिकारियों को देते हैं और रजिस्टर में भी नोट करवाते हैं, लेकिन अधिकारी इन पर लगाम लगाने के बजाय कर्मचारियों को ही मानसिक रूप से प्रताड़ित करने में जुटे हैं।
भूख हड़ताल की चेतावनी
राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब उनके आत्मसम्मान और सभी परिचालकों के अधिकारों की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया और डिपो की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो वे भूख हड़ताल और आमरण अनशन शुरू करने को मजबूर होंगे।
फिलहाल, इस धरने को लेकर अन्य कर्मचारियों में भी सुगबुगाहट तेज है, जिससे आने वाले दिनों में रोडवेज की सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
(*बाइट 01 परिचालक राजेंद्र प्रसाद शर्मा*)
(*बाइट 02 परिचालक राजेंद्र प्रसाद शर्मा*)

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