जयपुर में हेरिटेज क्षेत्रों में अवैध निर्माण: अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही से खतरे में जनजीवन


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जयपुर में हेरिटेज क्षेत्रों में अवैध निर्माण: अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही से खतरे में जनजीवन
जयपुर, 22 दिसंबर 2025 — राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक हेरिटेज क्षेत्रों में अवैध निर्माण का खेल जारी है। नगर निगम हेरिटेज की लापरवाही और कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते पुराने जर्जर मकानों पर नई इमारतें खड़ी हो रही हैं, जिससे स्थानीय निवासियों की जान जोखिम में पड़ रही है। UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल जयपुर की चारदीवारी के अंदर ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जहां बिना स्वीकृति के निर्माण कार्य चल रहे हैं।
एक ऐसा ही मामला किशनपोल बाजार के चौड़ा रास्ता इलाके में देखने को मिल रहा है। यहां एक पुराने जर्जर मकान पर बिना किसी अनुमति के नई इमारत बनाई जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मकान मालिक ने दावा किया कि उनके पास 1974 से परमिशन है, लेकिन जब परमिशन दिखाने को कहा गया तो उन्होंने टालमटोल किया। आसपास के लोग कई बार नगर निगम में शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, नगर निगम के कर्मचारी मौके पर आए, मकान मालिक से बातचीत की और बिना कोई रोक-टोक के चले गए।
यह समस्या जयपुर के हेरिटेज जोन में आम हो गई है। किशनपोल जोन में ही हाल के महीनों में कई अवैध निर्माणों पर कार्रवाई हुई है, जैसे दुकानों और कॉम्प्लेक्स को सीज किया गया, लेकिन कई मामलों में सीज खुलते ही निर्माण फिर शुरू हो जाता है। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि अधिकारी रिश्वत लेकर आंखें मूंद लेते हैं, जिससे साधारण नागरिकों की शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।
ऐसे अवैध निर्माणों का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। जयपुर में जर्जर इमारतों के गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में भारी बारिश के कारण कई पुराने मकान धराशायी हो चुके हैं, जिसमें लोगों की जानें गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना परमिशन के ऊपरी मंजिलें बनवाने और पुरानी संरचनाओं को मजबूत किए बिना निर्माण करने से इमारतें असुरक्षित हो जाती हैं।
नगर निगम हेरिटेज के अधिकारियों ने ऐसे मामलों में कार्रवाई का दावा किया है, लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है कि कार्रवाई सिर्फ दिखावटी होती है। हाईकोर्ट ने भी जयपुर की चारदीवारी में अवैध निर्माणों पर सख्ती बरतने के आदेश दिए हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि नगर निगम तुरंत कार्रवाई करे, अवैध निर्माणों को ध्वस्त करे और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। अन्यथा, जयपुर की ऐतिहासिक धरोहर और जनता की जान दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।

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