विधि आयोग को सशक्त बनाकर ही देश में समयबद्ध और प्रभावी कानूनी सुधार संभव:— मदन राठौड़
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विधि आयोग को सशक्त बनाकर ही देश में समयबद्ध और प्रभावी कानूनी सुधार संभव:— मदन राठौड़
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चुनाव सुधार और मानहानि कानून पर विधि आयोग की सिफारिशें लोकतंत्र को करेगी मजबूत:— मदन राठौड़
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न्यायिक पारदर्शिता और जवाबदेही से न्याय व्यवस्था पर बढ़ेगा जनता का विश्वास:— मदन राठौड़
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जयपुर, 16 दिसंबर 2025। राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने विधि आयोग के सशक्तिकरण को लेकर विधि और न्याय मंत्री से संसद के पटल पर महत्वपूर्ण सवाज लगाए। राठौड़ ने चुनाव सुधार और मानहानि कानून जैसे संवेदनशील विषयों का समयबद्ध तथा प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के संबंध में सवाल लगाए। राठौड़ के सवाल के जवाब में विधि और न्याय मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि मंत्रालय भारतीय विधि आयोग की सभी रिपोर्ट को संबंधित मंत्रालयों और विभागों को भेजकर उनकी गहन समीक्षा और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन सुधार और मानहानि विधियों से जुड़ी सिफारिशों पर भी गंभीरता से कार्य किया जा रहा है तथा इनके क्रियान्वयन की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जाती है। संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों के अनुरूप, संसद के दोनों सदनों के समक्ष लंबित विधि आयोग की रिपोर्टों की स्थिति को दर्शाने वाला वार्षिक विवरण भी नियमित रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में विधि आयोग में दो विधि अधिकारी तैनात हैं और आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर विधिक सलाहकारों की नियुक्ति कर उन्हें विधिक अनुसंधान का दायित्व सौंपा जाता है। इससे आयोग के शोध कार्यों को मजबूती मिलती है और दीर्घकालिक कानूनी सुधारों की दिशा में ठोस आधार तैयार होता है। न्यायिक जवाबदेही के मुद्दे पर सरकार ने स्पष्ट किया कि पूर्व में “न्यायिक मानक और जवाबदेही विधेयक, 2010” पेश किया गया था, हालांकि लोकसभा के विघटन के कारण वह विधेयक समाप्त हो गया। वर्तमान में उच्च न्यायपालिका के लिए स्थापित “इन-हाउस प्रक्रिया” के तहत न्यायाधीशों के आचरण से संबंधित शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था मौजूद है, जिससे न्यायिक गरिमा और पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही न्यायिक परिसंपत्तियों के प्रकटीकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय लिया है कि न्यायाधीशों की संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक डोमेन में, सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। यह निर्णय न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और जनविश्वास को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने इस विषय पर सरकार की पहल को न्यायिक सुधारों की दिशा में सकारात्मक कदम बताते हुए विधि आयोग को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
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