राजस्थान में आज रात से नहीं चलेगी 8000 स्लीपर बसें:2 नवंबर से सभी प्राइवेट बसों का चक्का-जाम; ट्रेवल्स एजेंसियों ने बंद की ऑनलाइन बुकिंगजोधपुर
राजस्थान में आज रात से नहीं चलेगी 8000 स्लीपर बसें:2 नवंबर से सभी प्राइवेट बसों का चक्का-जाम; ट्रेवल्स एजेंसियों ने बंद की ऑनलाइन बुकिंग
जोधपुर
ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ऑनर एसोसिएशन ने 31 अक्टूबर से प्रदेशभर में स्लीपर बसों का संचालन बंद करने का ऐलान कर दिया है। इसका मतलब है कि गुरुवार आधी रात से करीब 8000 स्लीपर बसें सड़कों पर नहीं दौड़ेगी।
राजस्थान से देश के कई राज्यों में जाने वाली इन बसों में औसतन 3 लाख लोग रोजाना यात्रा करते हैं। ट्रेवल्स एजेंसियों ने जोधपुर समेत कई शहरों से चलने वाली बसों की ऑनलाइन बुकिंग बंद कर दी है। राजस्थान बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने 2 नवंबर से चक्का-जाम की चेतावनी दी है।
एसोसिएशन ने कहा- 2 दिन स्लीपर बस बंद होने के बाद सरकार का रुख देखा जाएगा। सकारात्मक रुख नहीं होने पर 2 नवंबर से प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा प्राइवेट बसें सड़कों से हट जाएगी। इसमें ग्रामीण सेवा में शामिल बसें, स्कूल बसें, स्टेट कैरिज, उप नगरीय बसें और लोक परिवहन बसें शामिल होगी।
ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ऑनर एसोसिएशन के सदस्यों ने बैठक कर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।
ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ऑनर एसोसिएशन के सदस्यों ने बैठक कर हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।
एसोसिएशन ने की 31 अक्टूबर से हड़ताल की घोषणा
ऑल इंडिया टूरिस्ट बस ऑनर एसोसिएशन ने 31 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। एसोसिएशन के सचिव राजेंद्र परिहार ने बुधवार को मुख्यमंत्री को एक लेटर भेजा था। इसमें यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए सरकार से यात्रियों की सुविधा के लिए अपने स्तर पर व्यवस्था करने के लिए कहा है।
एसोसिएशन ने हड़ताल का कारण बताते हुए कहा- परिवहन विभाग द्वारा 29 अक्टूबर को जारी किए गए एक आदेश के चलते यह फैसला लिया है। प्रदेश भर में चल रही निजी बसों पर चेकिंग के नाम पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है और लगातार बसों को सीज किया जा रहा है।
एसोसिएशन का कहना है कि उन्होंने पहले भी सरकार से आग्रह किया था कि यदि नियमों का पालन नहीं हो रहा है, तो बस ऑपरेटरों को आवश्यक सुधार करने के लिए कुछ समय दिया जाए। साथ ही, जो नियम निजी बसों पर लगाए जा रहे हैं, वे सरकारी बसों पर भी लागू होने चाहिए और उन पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन विभाग एकतरफा कार्रवाई कर रहा है, जो कि उचित नहीं है।
यात्रियों से वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपील
एसोसिएशन के सदस्य यात्रियों से विभिन्न माध्यमों से संपर्क कर हड़ताल के दौरान होने वाली असुविधा पर खेद जता रहे हैं। साथ ही, अपनी यात्रा के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने की अपील की है।
ऑल इंडिया टूर एंड ट्रेवल्स एसोसिएशन ने भी की हड़ताल की घोषणा
सीकर में ऑल इंडिया टूर एंड ट्रेवल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ईशाक खान ने बताया- राजस्थान में बसों पर RTO की कार्रवाई के विरोध में 31 अक्टूबर से हड़ताल शुरू होने जा रही है। इस दौरान समस्त सिटिंग और स्लीपर बस बंद रहेंगे। इसके साथ ही ऑफिस भी बंद रखे जाएंगे।
2 नवंबर से 20 हजार हजार बसों का चक्का-जाम होगा
राजस्थान बस ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष सत्यनारायण साहू ने बताया- ऑल इंडिया टूरिस्ट की ओर से 31 अक्टूबर से स्लीपर बसें बंद रहेगी। इसके बाद 2 नवंबर को प्रदेश भर में ग्रामीण सेवा में शामिल बसें, स्कूल बस, स्टेट कैरिज, उप नगरीय बस और लोक परिवहन बस सहित तमाम बसें बंद की जाएगी।
उन्होंने बताया- 2 दिन स्लीपर बस बंद करने के बाद सरकार का रुख देखा जाएगा। सरकार का सकारात्मक रुख नहीं होने पर 2 नवंबर से प्रदेश में 20 हजार से ज्यादा प्राइवेट बसें सड़कों से हट जाएगी। इसके कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
साहू ने बताया- परिवहन विभाग ने निजी बसों पर एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी है। जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर हुए बस अग्निकांड और जयपुर के मनोहरपुर में हुए हादसे के बाद विभाग ने सुरक्षा के नाम पर निजी बसों की चेकिंग और सीज करने का अभियान चला रखा है।
उन्होंने बताया- परिवहन विभाग मनमाने तरीके से बसों को जब्त कर रहा है और बिना उचित कारण चालान काटे जा रहे हैं। अब तक 1000 से ज्यादा बसों के चालान हो चुके हैं और 200 से ज्यादा बसें सीज की जा चुकी है। इससे बस मालिकों को लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है।
स्लीपर बसों को जांच के लिए जारी की थी 12 बिंदुओं की लिस्ट
राजस्थान परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने 29 अक्टूबर 2025 को एक आदेश जारी किया है। विभाग ने स्लीपर बसों की जांच के लिए 12 बिंदुओं की एक लिस्ट जारी की है। इसमें बसों के टाइप अप्रूवल सर्टिफिकेट, आपातकालीन निकास (12 मीटर तक की बस में 4 और उससे अधिक लंबाई में 5), चेसिस का अवैध कटाव, नियम विरुद्ध वर्टिकल बीम, स्लीपर बर्थ की न्यूनतम लंबाई (1800 मिमी), नियम विरुद्ध पार्टीशन गेट, छत पर अवैध लगेज कैरियर, एसी/नॉन एसी पंजीकरण की जांच और एक ही पंजीकरण नंबर के दुरुपयोग की जांच जैसे मुद्दे शामिल हैं।
नियम तोड़ने वाली बसों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर किया जाएगा
आदेश में यह भी कहा गया है कि नियम तोड़ने वाली बसों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा और उन्हें तभी वापस चालू किया जाएगा, जब वे सभी नियमों का पालन करेंगी। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर कोई स्लीपर बस नियमों का उल्लंघन करती हुई पाई जाती है, तो इसके लिए संबंधित आरटीओ/डीटीओ को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
बस ऑपरेटरों के सवाल: क्या दोषी केवल बस ऑनर्स ही हैं?
संगठन का कहना है कि क्या दोषी केवल बस ऑनर्स ही हैं? यदि बसों में कोई खामी भी है तो उसे दूर करने के लिए बस ऑनर्स को मोहलत भी तो मिलनी चाहिए। रातों-रात कोई खामी दूर नहीं की जा सकती है। संगठन का तर्क है कि सरकारी अधिकारियों ने ही इन बसों को मंजूरी दी थी, इसलिए दोष सिर्फ बस मालिकों पर थोपना गलत है।
बस ऑपरेटरों का कहना है कि वे पहले से ही उच्च कर दरों (स्लीपर बसों पर 30,000-40,000 रुपए वार्षिक और ऑल इंडिया रूट परमिट पर 3 लाख रुपए) से जूझ रहे हैं और अचानक सख्त कार्रवाई से उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो जाएगा। इसी कारण संगठन ने 31 अक्टूबर 2025 से सभी वर्गों की बसों का संचालन बंद करने की घोषणा की है।
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