जयपुर राजस्थान में खोनागोरिया तलाई हादसे के बाद अवैध बसावट पर उठे सवाल, खान भाइयों की भूमिका की जांच की मांग
खोनागोरिया तलाई हादसे के बाद अवैध बसावट पर उठे सवाल, खान भाइयों की भूमिका की जांच की मांग
जयपुर। खोनागोरिया थाना क्षेत्र के पीछे स्थित तलाई इलाके में 9 जून को हुई पटाखा फैक्ट्री दुर्घटना में 8 लोगों की दर्दनाक मौत के बाद अब पूरे क्षेत्र में कथित अवैध बसावट, भूमि उपयोग और निर्माण कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस हादसे में एक मासूम बच्चे सहित आठ लोगों की जान चली गई, जिसके बाद क्षेत्र के विकास और प्रशासनिक निगरानी को लेकर बहस तेज हो गई है।
देश का दर्पण न्यूज़ को स्थानीय लोगों और क्षेत्र से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर यह मांग उठाई जा रही है कि तलाई क्षेत्र में पिछले वर्षों में विकसित हुई बसावट की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि पर कब्जे कर अवैध रूप से प्लॉटिंग और निर्माण कार्य किए गए हैं तथा आज भी नए मकानों का निर्माण लगातार जारी है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि कई मकानों में वास्तविक मालिक नहीं रहते, बल्कि उन्हें किराए पर दिया गया है। लोगों का आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि भविष्य में प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति में इन निर्माणों को हटाने में कठिनाई उत्पन्न हो सके।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र के विकास और भूमि के कथित आवंटन में खान भाइयों की भूमिका रही है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि उपलब्ध दस्तावेजों, भूमि अभिलेखों और अन्य तथ्यों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि क्षेत्र में हुई बसावट कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई है या नहीं। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर रोक लगाई जाती तो रिहायशी क्षेत्र के बीच इस प्रकार की जोखिमपूर्ण गतिविधियां संचालित नहीं हो पातीं। पटाखा फैक्ट्री हादसे ने प्रशासनिक निगरानी और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
नागरिकों ने मांग की है कि सरकार पूरे तलाई क्षेत्र का सर्वे कराए और भूमि की स्थिति, निर्माण स्वीकृतियों, भूखंडों के आवंटन तथा बसावट की वैधता की विस्तृत जांच कराए। यदि कहीं भी अवैध निर्माण, अतिक्रमण या नियमों के विपरीत बसावट पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया और बाद में बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई तो सामाजिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसलिए अभी से पारदर्शी जांच और निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार के विवाद, जनहानि या भाईचारे को नुकसान पहुंचाने वाली परिस्थितियों से बचा जा सके।
लोगों ने यह भी मांग की है कि पटाखा फैक्ट्री हादसे की जांच के साथ-साथ तलाई क्षेत्र में भूमि उपयोग, निर्माण गतिविधियों और कथित अवैध बसावट की भी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध उचित कार्रवाई हो सके।
— उमेंद्र राजपूत
देश का दर्पण न्यूज़

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