उदयपुर में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान का उत्सवी आगाज— पूर्वजों ने सहेजा जल तभी हमें मिल रहा, हम आज सहेजेंगे तो आने वाली पीढ़ियां भी सीखेंगी - राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री गंगा पूजन, कलश यात्रा के साथ गूंजा जल संरक्षण का संदेश, शहर से लेकर गांव-ढाणी तक हुए आयोजन


उदयपुर में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान का उत्सवी आगाज— पूर्वजों ने सहेजा जल तभी हमें मिल रहा, हम आज सहेजेंगे तो आने वाली पीढ़ियां भी सीखेंगी - राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री गंगा पूजन, कलश यात्रा के साथ गूंजा जल संरक्षण का संदेश, शहर से लेकर गांव-ढाणी तक हुए आयोजन

जयपुर, 5 जून। जल एवं पर्यावरण का संरक्षण करते हुए जल आत्मनिर्भर और हरा भरा राजस्थान बनाने और आमजन को जल संचय के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की पहल पर गुरूवार को उदयपुर के दूध तलाई पर जिला प्रभारी तथा राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री श्री हेमन्त मीणा ने गंगा दशमी और विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान का उत्सवी अंदाज में आगाज किया ।

इस अवसर पर जिला से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक जनभागीदारी के साथ जल स्त्रोतों की साफ-सफाई कर गंगा पूजन, पीपल पूजन और कलश यात्राओं के माध्यम से जल संचय का संदेश गुंजायमान किया गया।

गंगा पूजन कर दिलाया संकल्प —

प्रभारी मंत्री श्री मीणा ने दूधतलाई के किनारे स्थित उद्यान परिसर से विधिवत् पूजन कर कलश यात्रा को रवाना किया। कलश यात्रा दूध तलाई स्थित मुख्य छतरी के पास घाट पर पहुंची। वहां प्रभारी मंत्री सहित सभी अतिथियों ने गंगा पूजन किया। इससे पूर्व प्रभारी मंत्री श्री मीणा ने सभी को जल संचय एवं पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।

यह कार्यक्रम दूध तलाई घाट पर जिला प्रशासन, नगर निगम, राजीविका एवं जल संसाधन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में खान एवं पेट्रोलियम विभाग के प्रमुख शासन सचिव व जिले के प्रभारी सचिव श्री टी रविकांत, सांसद डॉ मन्नालाल रावत, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, संभागीय आयुक्त सुश्री प्रज्ञा केवलरमानी, जिला कलक्टर नमित मेहता आदि के आतिथ्य में हुआ।

जन-भागीदारी से होगा जल संरक्षण का संकल्प पूर्ण—

प्रभारी मंत्री श्री हेमंत मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दे रही है। “वंदे गंगा” अभियान इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे जल स्रोतों की स्वच्छता, वर्षा जल संचयन एवं परंपरागत जलधाराओं के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। हमारे पूर्वजों ने जल का महत्व समझते हुए उसके संरक्षण के लिए तालाब, झीलें बनवाई। उनकी दूरदर्शिता का लाभ आज भी हमें मिल रहा है। हमारा दायित्व है कि हम आज जल संचय कर आने वाली पीढ़ियों को भी इसकी सीख दें।

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