पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा - दिव्यांग छात्र को मिला सहारा, अब शिक्षा की राह होगी आसान—मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने गणेशाराम को सौंपी इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल

पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा - दिव्यांग छात्र को मिला सहारा, अब शिक्षा की राह होगी आसान—
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने गणेशाराम को सौंपी इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल

किसी भी सरकार के सुशासन और नैतिकता का सबसे बड़ा पैमाना यह है कि वह सबसे पिछड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने के लिए क्या कर रही है। राजस्थान सरकार ने पिछले 2 वर्ष में इस दिशा में अनेक प्रतिमान गढ़े हैं और इसकी ताजा कड़ी है पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा। इस पखवाड़े के तहत जोधपुर जिले की ग्राम पंचायत दईजर (पंचायत समिति केरू) में गुरूवार को आयोजित जनकल्याण शिविर में एक अनमोल क्षण तब देखने को मिला जब देसुरिया करवड़ निवासी गणेशाराम को मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कर-कमलों से इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल प्राप्त हुई।

गणेशाराम सुचेता कृपलानी महाविद्यालय में बी.ए. तृतीय वर्ष का विद्यार्थी है, दोनों पैरों से दिव्यांग है। कॉलेज उसके गांव से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मे गणेशाराम के पिता वृद्ध हैं और परिवार की आजीविका का कोई स्थायी स्रोत नहीं है। कॉलेज जाने के लिए उसे अब तक कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

मुख्यमंत्री जी द्वारा प्रदान की गई इलेक्ट्रिक ट्राई साइकिल, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की संयुक्त सहायता योजना के अंतर्गत दी गई है जिससे गणेशाराम के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है। साइकिल प्राप्त करते हुए गणेशाराम की आँखों में जो चमक थी, उसने बता दिया कि यह सहायता उसके लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि स्वावलंबन की सवारी है।

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने इस अवसर पर कहा, “सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति अपनी अक्षमता या संसाधनों की कमी के कारण पीछे न रह जाए। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय के सिद्धांत पर चलते हुए हम अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

गणेशाराम ने बताया, “अब मुझे कॉलेज जाने में परेशानी नहीं होगी। मैं समय पर पहुंच सकूंगा, खुद अपने काम भी कर सकूंगा। मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं, जिन्होंने मुझ जैसे गरीब और दिव्यांग छात्र के सपनों को उड़ान दी है।”

दईजर शिविर में इस तरह के कई संवेदनशील और जनकल्याणकारी क्षण देखने को मिले। गणेशाराम की मुस्कान ने यह सिद्ध कर दिया कि सरकार की योजनाएं जब सही हाथों तक पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ लाभ नहीं, भविष्य गढ़ती हैं।

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