डीडवाना , एयरटेल फाइबर की अवैध खुदाई ने शहर को बनाया 'खंदक', बेखौफ ठेकेदार उड़ा रहे नियमों की धज्जियाँ"
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*डीडवाना ,
एयरटेल फाइबर की अवैध खुदाई ने शहर को बनाया 'खंदक', बेखौफ ठेकेदार उड़ा रहे नियमों की धज्जियाँ"
प्रशासनिक मौन या मिलीभगत? बिना परमिशन पूरा जिला खोद डाला; प्यासा है डीडवाना, सड़कों पर तड़प रहे बेजुबान"
डीडवाना में एयरटेल का 'खूनी' खेल: मासूम हाथों से खुदवाई जा रही शहर की कब्र, न सुरक्षा के इंतजाम न अनुमति के कागज"
सड़कों पर 10 फीट गहरे 'डेथ ट्रैप': एयरटेल फाइबर के गड्ढों में समा रही जनता की सुरक्षा, PWD ने दी FIR की चेतावनी"
डीडवाना। शहर की शांति और व्यवस्था इन दिनों एक निजी टेलीकॉम कंपनी 'एयरटेल' की लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। शहर में इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थानीय मोहल्लों और मुख्य मार्गों पर धड़ल्ले से सड़कों की खुदाई की जा रही है, लेकिन सुरक्षा मानकों का कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। न तो संबंधित विभाग से अनुमति ली जा रही है और न ही खुदाई के बाद गड्ढों को भरने की जहमत उठाई जा रही है।एयरटेल फाइबर द्वारा अंडरग्राउंड लाइन डालने के नाम पर पूरे शहर और जिले की मुख्य सड़कों को छलनी कर दिया गया है। आलम यह है कि हर 10-20 फीट पर 5 से 10 फीट गहरे गड्ढे खोदकर उन्हें लावारिस छोड़ दिया गया है, जो अब राहगीरों और पशुओं के लिए 'मौत के कुएं' साबित हो रहे हैं।
*नियमों की धज्जियां: न परमिशन, न सुरक्षा*
मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सरकारी विभागों ने किया है। PWD के अधिशाषी अभियंता जितेंद्र जांगिड़ ने स्पष्ट किया कि विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है। वहीं PHED के कनिष्ठ अभियंता महिपाल बुडानिया ने बताया कि कंपनी के ठेकेदार ने हॉस्पिटल चौराहे सहित कई जगहों पर मुख्य पेयजल लाइनें तोड़ दी हैं, जिससे शहर की जलापूर्ति ठप हो गई है। जब ठेकेदार से अनुमति पत्र माँगा गया, तो वह बगले झांकने लगा।
*मासूमों का शोषण: बाल श्रम का काला खेल*
खबर यह भी है कि इस अवैध कार्य को अंजाम देने के लिए ठेकेदार द्वारा नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। भारी मशीनों और गहरे गड्ढों के बीच छोटे बच्चों से मजदूरी करवाकर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों और बाल श्रम कानूनों का उल्लंघन है।
*ग्राउंड जीरो की पुकार: "कल भर देंगे" का झूठा दिलासा*
स्थानीय नागरिकों में भारी रोष है। एक बुजुर्ग महिला ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनके घर के आगे 5 दिनों से गहरा गड्ढा खुला है। उन्होंने कहा, "कल एक सांड इसमें गिरते-गिरते बचा, अगर वह गिर जाता तो उसका पाप हमें लगता। कर्मचारी रोज 'कल भर देंगे' कहकर चले जाते हैं।" मोहल्ले वासियों का कहना है कि अगर जल्द ही ये गड्ढे नहीं भरे गए और सड़कों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
*प्रशासन की चेतावनी*
PWD विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल काम रुकवा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और जनहानि का खतरा पैदा करने के जुर्म में कंपनी और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज करवाई जाएगी।
*प्रशासन की चेतावनी बे असर प्रशासन को सामने से चुनौती*
संबंधित विभाग के द्वारा काम रुकवाने के बावजूद ठेकेदार अपनी मनमानी कर काम चालू रखा है और विभाग की कार्य प्रणाली पर बड़े सवाल खड़ा कर रहा है विभाग को चुनौती दे रहा है कि आप में जो होता है कर लो हम तो ऐसे ही काम करेंगे और पूरे शहर को खोदा जा रहा है और विभाग छुपी सादे बैठा है।
*हादसों को खुला निमंत्रण*
नियमों के अनुसार, सड़क खुदाई के दौरान कार्य स्थल पर प्रॉपर बैरिकेटिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना अनिवार्य है ताकि रात के समय वाहन चालक या राहगीर दुर्घटना का शिकार न हों। लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। कई जगहों पर गहरे गड्ढे बिना किसी सुरक्षा घेरे के छोड़ दिए गए हैं। मिट्टी के ढेरों के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालक लगातार फिसल रहे हैं।
खुदाई के बाद मलबे को सड़क पर ही छोड़ देने से न केवल धूल का गुबार उड़ रहा है, बल्कि हल्की बारिश में ये गड्ढे पानी से भर जाते हैं। पानी भरे होने के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाज़ा नहीं मिल पाता, जो किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
*क्या कहते हैं नियम*
लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगर निगम के स्पष्ट निर्देश हैं कि खुदाई के तुरंत बाद गड्ढे को पक्का (सीमेंटेड) किया जाए। कार्य के दौरान पशुओं और आम लोगों की सुरक्षा के लिए जाली या बैरिकेटिंग लगाना ठेकेदार की जिम्मेदारी है। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माने और जेल तक का प्रावधान है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के सड़कें खोद दी जाती हैं, जिससे उनके घर के बाहर आवाजाही मुश्किल हो गई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन अवैध कार्यों पर तुरंत रोक लगाई जाए और जिम्मेदार ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
(*बाइट 01 PWD अधिशाषी अभियंता जितेंद्र जांगिड़*)

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