जयपुर: सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों वाले आदेश के खिलाफ पत्रिका गेट पर डॉग लवर्स का जोरदार प्रदर्शन
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जयपुर: सुप्रीम कोर्ट के आवारा कुत्तों वाले आदेश के खिलाफ पत्रिका गेट पर डॉग लवर्स का जोरदार प्रदर्शन
**जयपुर, 09 नवंबर 2025:** राजस्थान की राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक पत्रिका गेट पर आज स्ट्रीट डॉग लवर्स ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की और नारे लगाते हुए कहा, "कुत्तों को आजादी दो, शेल्टर में कैद मत करो!"
सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को आवारा कुत्तों पर तीन सख्त निर्देश जारी किए थे। इनमें स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में भेजने, हाईवे-एक्सप्रेसवे से मवेशियों को हटाने और नसबंदी के बाद कुत्तों को मूल स्थान पर न छोड़ने के आदेश शामिल हैं। कोर्ट ने सभी राज्यों को 8 सप्ताह में कार्रवाई पूरी करने का समय दिया है, ताकि डॉग बाइट और रेबीज की घटनाओं पर अंकुश लगे।
आईए जानते हैं की सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिए हैं
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त फैसला: स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों से तत्काल हटावें, शेल्टर होम में रखें
**नई दिल्ली, 9 नवंबर 2025 (स्पेशल रिपोर्ट)**: देशभर में कुत्तों के काटने की घटनाओं से परेशान जनता को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार (7 नवंबर) को जारी अपने ऐतिहासिक आदेश में कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए। इन कुत्तों को पकड़ने के बाद स्टरलाइजेशन (नसबंदी) और वैक्सीनेशन के बाद नामित शेल्टर होम में रखा जाए, ताकि वे दोबारा इन जगहों पर न लौट सकें।
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच—जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजनिया—ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि "कुत्तों के काटने की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।" बेंच ने स्थानीय नगर निगमों और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे इन स्थानों पर बाड़बंदी, गेट पर गार्ड तैनाती और नियमित निरीक्षण जैसे कदम उठाएं। प्रत्येक संस्थान को एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का भी आदेश दिया गया है, जो इन व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा।
तीन प्रमुख निर्देश: क्या बदलेगा?
कोर्ट ने अपने आदेश को तीन हिस्सों में बांटा है, जो आवारा कुत्तों के अलावा सड़क पर घूमने वाले मवेशियों पर भी लागू होगा:
1. **एमिकस क्यूरी रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई**: राज्यों को एमिकस क्यूरी (कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ) की रिपोर्ट पर एफिडेविट दाखिल करने और कदम उठाने का आदेश। कोर्ट ने चेतावनी दी कि कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
2. **हाईवे और सड़कों से मवेशी हटाव**: राजस्थान हाईकोर्ट के अगस्त 2025 के फैसले को पूरे देश में लागू करते हुए, कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि हाईवे, एक्सप्रेसवे और सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाया जाए। इन्हें गौशालाओं या पशु आश्रयों में रखा जाए, न कि वापस सड़क पर छोड़ा जाए। संयुक्त अभियान चलाकर पहचानें और हटावें।
3. **सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश प्रतिबंध**: स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों आदि में कुत्तों के घुसने को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम। नगर निगमों को 24x7 पेट्रोलिंग टीम गठित करने और हेल्पलाइन नंबर जारी करने का आदेश। कुत्तों को सार्वजनिक जगहों पर खाना न खिलाने पर भी सख्ती बरतें।
कोर्ट ने सभी राज्यों को 8 सप्ताह (13 जनवरी 2026 तक) में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का समय दिया है। गैर-अनुपालन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
पृष्ठभूमि: क्यों आया यह फैसला?
यह मामला जुलाई 2025 में तब शुरू हुआ जब 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की एक रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों से 6 साल की बच्ची की मौत का जिक्र आया। कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पहले 11 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को शेल्टर में बंद करने का आदेश दिया, लेकिन पशु कल्याण संगठनों के विरोध के बाद चीफ जस्टिस ने इसे तीन जजों की बेंच को सौंपा। 22 अगस्त को संशोधित आदेश जारी हुआ, जिसमें नसबंदी के बाद कुत्तों को वापस छोड़ने की छूट दी गई, लेकिन आक्रामक या रेबीज प्रभावित कुत्तों को नहीं।
अक्टूबर-नवंबर में कोर्ट ने राज्यों की लापरवाही पर नाराजगी जताई। 27 अक्टूबर को मुख्य सचिवों को तलब किया, और 3 नवंबर को अधिकांश मुख्य सचिव पेश हुए। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 37 लाख से ज्यादा कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हैं, जिनमें दिल्ली में अकेले 25,000 से अधिक।
विशेषज्ञों की राय: संतुलन की कोशिश
पशु कल्याण बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) को मामले में पक्षकार बनाया गया है। वकील नमिता शर्मा ने इसे "कठोर लेकिन जरूरी" बताया, लेकिन चेतावनी दी कि शेल्टर होम की कमी से समस्या बढ़ सकती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अधिकांश राज्य अनुपालन कर रहे हैं। एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह आदेश पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 के ABC नियमों 2023 के अनुरूप है, लेकिन कार्यान्वयन में पारदर्शिता जरूरी।
यह फैसला न केवल कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकेगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को भी कम करेगा, जहां मवेशी बड़ी वजह हैं। अब सवाल यह है कि राज्य कितनी जल्दी अमल करेंगे। अगली सुनवाई 13 जनवरी को होगी।
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