जयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: इन्वेस्टमेंट के नाम पर ₹15.04 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, सीकर से आरोपी गिरफ्तार


​जयपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: इन्वेस्टमेंट के नाम पर ₹15.04 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, सीकर से आरोपी गिरफ्तार
​म्यूल बैंक खातों और वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में ₹4 करोड़ की साइबर ठगी का भी हुआ भंडाफोड़
​जयपुर (विशेष संवाददाता):
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर पुलिस थाने ने मुस्तैदी और त्वरित तकनीकी अनुसंधान का परिचय देते हुए इंटरनेशनल मार्केट में इन्वेस्टमेंट के नाम पर हुई ₹15,04,999 (15.04 लाख रुपये) की साइबर ठगी का खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए राजस्थान के सीकर जिले से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस की गहन पूछताछ में आरोपी से देशभर में वर्चुअल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से अंजाम दी गई ₹4 करोड़ की विशाल साइबर ठगी का पर्दाफाश हुआ है।  
​यह था मामला
​पुलिस के अनुसार, परिवादी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उससे कथित 'ezinvest' कंपनी के नाम से इंटरनेशनल मार्केट में कमोडिटी आदि में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया गया था। ठगों ने 3 जुलाई 2026 से 27 जुलाई 2026 के दौरान 6 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल ₹15.04 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। शिकायत मिलने पर साइबर पुलिस थाना में प्रकरण संख्या 124/2026 दर्ज कर जांच शुरू की गई।  
​कार्रवाई और गिरफ्तारी
​पुलिस उपायुक्त (अपराध) अनुष्ठा कालिया (IPS) के मार्गदर्शन एवं श्री हेमराज ACP साइबर क्राइम व थानाधिकारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम प्रभारी हेड कांस्टेबल संजय कुमार और उनकी टीम ने बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया। तकनीकी अनुसंधान के आधार पर आरोपी पवन कुमार सैनी (पुत्र मंगल चन्द सैनी, निवासी- वार्ड नं. 02, रॉयल रोड, घाटेश्वर, खण्डेला, जिला सीकर) को दस्तयाब कर गिरफ्तार कर लिया गया।  
​ठगी का तरीका (Modus Operandi):
​सॉफ्ट टारगेट की पहचान: आरोपी बुजुर्गों, कम पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अपना शिकार बनाते थे, जो डिजिटल बैंकिंग से कम वाकिफ हैं।  
​कमीशन का लालच: इन्हें ₹1,000 से ₹5,000 प्रति बैंक खाते का लालच देकर उनके नाम पर खाते (Mule Accounts) खुलवाए जाते थे।  
​खातों का पूरा नियंत्रण: पीड़ितों के आधार व पैन कार्ड से नई सिम निकालकर बैंक खाते खोले जाते थे, लेकिन नेट बैंकिंग, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और एटीएम कार्ड आरोपी अपने पास रखते थे।  
​वर्चुअल प्लेटफॉर्म से पैसों की हेराफेरी: देश के विभिन्न हिस्सों में डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी या टास्क फ्रॉड से ठगा गया पैसा इन्हीं खातों में मंगाया जाता था। इसके बाद ट्रैकिंग से बचने के लिए वर्चुअल प्लेटफॉर्म्स के जरिए पैसे को मुख्य सरगनाओं या विदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।  
​जयपुर पुलिस की आम जनता से अपील (Advisory):
​खाता किराए पर न दें: किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर या कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता न खुलवाएं और न ही किसी को इस्तेमाल के लिए दें।  
​सह-आरोपी बनने से बचें: यदि आपके खाते का उपयोग किसी भी अवैध गतिविधि में पाया जाता है, तो कानूनन आप भी उस अपराध में बराबर के सहभागी माने जाएंगे।  
​दस्तावेज़ सुरक्षित रखें: आधार, पैन, एटीएम पिन या बैंक OTP कभी किसी के साथ साझा न करें।  
​सतर्क रहें: व्हाट्सएप पर APK फाइल, पेंशनर कार्ड बनाने, शेयर मार्केट लिंक, या फिर ED, CBI, कस्टम अधिकारी बनकर वीडियो कॉल से डराने-धमकाने पर घबराएं नहीं। तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।  
​पुलिस टीम: इस कार्रवाई में अनुसंधान अधिकारी श्री हेमराज (RPS), हेड कांस्टेबल संजय कुमार, हेड कांस्टेबल दिलीप सिंह, कांस्टेबल संदीप कुमार एवं कांस्टेबल विक्की कुमार की विशेष भूमिका रही।  



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