समृद्धि और सशक्तिकरण की इबारत लिख रहीं ग्रामीण महिलाएं - स्वयं सहायता समूह का गठन कर बनीं आत्मनिर्भर।


समृद्धि और सशक्तिकरण की इबारत लिख रहीं ग्रामीण महिलाएं 
- स्वयं सहायता समूह का गठन कर बनीं आत्मनिर्भर।




रिपोर्ट राकेश पाण्डेय
देश का दर्पण जनपद सीतापुर उत्तर प्रदेश


    सीतापुर। जिले के पहला ब्लॉक के शंकरपुर गांव की महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वह समूहों में कार्य शुरू कर सशक्तीकरण  और समृद्धि की नई इबारत लिख रही हैं। यहां की ग्राम प्रधान कुसमा देवी के नेतृत्व में महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर किराना और परचून की दुकानों व बकरी पालन का काम शुरू किया है। कुछ महिलाओं ने कोरोना काल में मास्क  बनाकर अपनी आय अर्जित की है। 
    इस गांव में पन्द्रह महिला स्वयं सहायता समूह बने हैं, जिनमें से दुर्गा स्वयं सहायता समूह को राष्ट्रीय आजीविका मिशन से एक लाख दस हजार रुपए की सहायता भी मिल चुकी है। इस धनराशि से समूह की महिलाओं ने छोटे-छोटे कारोबार करने शुरू किए हैं। कुछ महिलाओं ने संयुक्त रूप से सौंदर्य प्रसाधन की दुकान शुरू की है, तो कुछ महिलाओं ने बकरी पालन। किसी ने पापड़ और चिप्स बनाने का कुटीर उद्योग शुरू किया है, तो किसी ने किराना और चप्पल-जूतों की दुकान खोली है। 
     ग्राम प्रधान कुसमा देवी भले ही अशिक्षित हों, लेकिन उनकी सोच बुलन्द है। वह कहती हैं कि क्षेत्र की बालिकाएं अधिकाधिक शिक्षित हों बुलंदी पर पहुंचे। महिलाओं को घूंघट और घर की चहारदीवारी से बाहर निकालने की जरूरत है। किशोरियां शिक्षा व खेल के तालमेल में बेहतर भविष्य बनाएं। उनका मानना है कि रूढ़िवादी परम्पराएं बालिकाओं और महिलाओं के विकास में बाधक हैं। महिलाएं घर से बाहर निकल आर्थिक रूप से सक्षम बनें। उनकी तरक्की के तमाम रास्ते खुले पड़े हैं। 
   वह कहती हैं कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें आत्म निर्भर बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की जरूरत है। यह महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो सकें और अपने परिवार का आर्थिक सहयोग कर सकें। इसी को लेकर मैंने गांव की महिलाओं को जागरूक कर महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया है। इन समूहों में से एक समूह को राष्ट्रीय आजीविका मिशन से आर्थिक लाभ दिलाया गया है, शेष समूहों को भी आर्थिक लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। 
    ग्राम पंचायत को लेकर शासन स्तर से छः समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों की हर माह नियमित रूप से बैठक होती है और इन बैठकों में वह स्वयं उपस्थित होती हैं। वह बताती हैं कि बालिका शिक्षा और नारी सशक्तिकरण पर हमारा विशेष फोकस है। उनकी कोशिश है उनकी ग्राम पंचायत आदर्श ग्राम पंचायत बने। वह बताती हैं कि बात चाहें गांव के विकास की हो या फिर महिलाओं को सशक्त बनाने की परिवार के सदस्यों, पंचों सभी से विचार-विमर्श करती हूं, उनके सुझाव भी लेती हूं, लेकिन अपनी विचारधारा के अनुरूप बिना किसी बाहरी दखल के निर्णय लेती हूं। महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करना और उन्हें पंचायतों में भागीदारी दिलाना मेरी प्राथमिकताओं में शामिल है। 
    पेस (पार्टीसेपेटरी एक्शन फार कम्युनिटी एम्पॉवरमेंट) संस्था की जिला समंवयक बीना पाण्डेय बताती है कि ग्राम प्रधानों और पंचायत सदस्यों की समझ को बढ़ाने, उन्हें पंचायती राज व्यवस्था, ग्राम पंचायत के विकास, शासकीय योजनाओं एवं उनके अधिकारों की जानकारी देने के लिए अजीम प्रेम जी फाउंडेशन के सहयोग से पेस संस्था द्वारा पहला ब्लॉक के तीस गांवों में पंचायती राज सशक्तीकरण परियोजना का संचालन किया जा रहा है। संस्था के वालंटियर स्वयं सहायता समूहों के गठन और राष्ट्रीय आजीविका मिशन से आर्थिक सहायता दिलाने में इन ग्रामीण महिलाओं की मदद करते हैं।
     वह बताती हैं कि अब तक पहला ब्लॉक की तीस ग्राम पंचायतों के प्रधान व पंचायत सदस्यों सहित कुल चार सौ साठ लोगों को पंचायती राज व्यवस्था के सम्बन्ध में जागरूक किया जा चुका है।

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